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Shayri

जो ज़मीं पर हैं वही रिश्ते बचाये रखिए
वक़्त पड़ने पे फ़रिश्ते नहीं आया करते
- डॉ. सुनील जोगी

निकल पड़े हो तो रफ़्तार पर रखो क़ाबू
तुम्हारा घर पे कोई इन्तिज़ार करता है
- डॉ. सुनील जोगी

ये फ़स्ल दिल के ही अन्दर उगानी पड़ती है
किसी दुकान पर ख़ुशियाँ नहीं मिला करतीं
- डॉ. सुनील जोगी

ग़मों से कह दो कि सब अपने अपने घर में रहें
हमेशा मेरी ही चौखट पे आ के बैठते हैं ।
- डॉ. सुनील जोगी

तुम्हारे बाद ज़माने में और क्या देखें
लो हमने चेहरे से आँखें उतार कर रख दी ।
- डॉ. सुनील जोगी

सोने के पिंजरे का पंछी तिनके की ख़्वाहिश रखता है
लेकिन इक इंसां को देखो क्या क्या फ़रमाइश रखता है ।
- डॉ. सुनील जोगी

ख़ूब चिल्ला के बोल देने से
झूठ सच में नहीं बदल जाता ।
- डॉ. सुनील जोगी

पलकों से कह दिया है ज़मीं पर उतार दें
ख़्वाबों के बोझ मुझसे उठाए न जाएँगे ।
- - डॉ. सुनील जोगी

सुनते हैं वहां रब की रहमत नहीं होती है
जिस घर में बुज़ुर्गों की इज़्ज़त नहीं होती है
- डॉ. सुनील जोगी

अजब मुश्किल का आलम है तुम्हें दिल से निकालें तो
अकेले तुम नहीं जाते, हमारी जान जाती है ।
- डॉ. सुनील जोगी

फलदार दरख़्तों में है झुकने का सलीक़ा
इन्सान मगर भूल चुका है ये तरीक़ा ।
- डॉ. सुनील जोगी

पीछे दुनिया है पड़ी मेरे दुशाला लेकर
मैं कहाँ जाऊँ तेरे नाम की माला लेकर
- डॉ. सुनील जोगी

वो मेरे जिस्म नहीं रूह में समाया है
उतार भी नहीं सकता मैं पैरहन की तरह
- डॉ. सुनील जोगी

न फूलों से गरज मुझको, न गुलशन की तमन्ना है
तेरी यादों की ख़ुशबू में नहाया घूमता हूँ मैं
- डॉ. सुनील जोगी

सब कुछ कह कर ये जाना
चुप रहना ही अच्छा था
- डॉ. सुनील जोगी

मिला न प्यार जिसे मां का उम्र भर उसको
हर एक चेहरे में बस मां दिखाई देती है
- डॉ. सुनील जोगी

उसने कहा कि कैसे भी रंजिश मिटाइए
मैंने कहा कि जब भी मिलें मुस्कुराइए
- डॉ. सुनील जोगी

मां से अच्छी मेरे भगवान की सूरत ही नहीं
मां है मौजूद तो मंदिर की ज़रूरत ही नहीं
- डॉ. सुनील जोगी

मैं आइना हूँ, हिफ़ाज़त से घर में रख मुझको
मैं टूट जाऊँ तो चेहरे बिखर से जाते हैं
- डॉ. सुनील जोगी

किसी के दर्द में रोया न हो जो मुद्दत से
उस आदमी को हँसाने में देर लगती है
- डॉ. सुनील जोगी

जो दर्द जानते हों वो रिश्ते नहीं मिले
ता उम्र हमको ऐसे फ़रिश्ते नहीं मिले
- डॉ. सुनील जोगी

सवाल ये है अब उससे सवाल कौन करे
जुनून सबमें है आँखों को लाल कौन करे
- डॉ. सुनील जोगी

ये फस्ल दिल के ही अन्दर उगानी पड़ती है
किसी दुकान पर ख़ुशियाँ नहीं मिला करतीं
- डॉ. सुनील जोगी

ये फस्ल दिल के ही अन्दर उगानी पड़ती है
किसी दुकान पर ख़ुशियाँ नहीं मिला करतीं
- डॉ. सुनील जोगी

हुस्न सोता है चैन की नींदें
इश्क़ बस करवटें बदलता है
- डॉ. सुनील जोगी

वो वक़्त था कि आप मुझे भूलते न थेv ये वक़्त है कि याद भी करना गुनाह है
- डॉ. सुनील जोगी

क़तरा क़तरा यही कहता है बचा लो मुझको।
क्योंकि पानी बिना दुनिया नहीं चलने वाली।
- डॉ. सुनील जोगी

ज़ुबां ख़ामोश हो जाए तो बातें छोड़ कर जाना
अगर दुनियाँ में रहना हो, तो आँखें छोड़कर जाना
- डॉ. सुनील जोगी

मैंने पेड़ों को भी बच्चों की तरह पाला है
मेरे सर से कभी साया नहीं जाने वाला
- डॉ. सुनील जोगी

एक ख़ुशी की ख़ातिर ग़म का पर्वत चढ़ना पड़ता है
जीने वालों से ही पूछो कितना मरना पड़ता है
- डॉ. सुनील जोगी

खुली आँखें कहाँ वो देख पाईं
जो दुनिया बन्द आंखों ने है देखी
- डॉ. सुनील जोगी

वो चले आए हैं आईना दिखाने हमको
अपने दामन में जो सौ दाग लिए बैठे हैं
- डॉ. सुनील जोगी

ये न सोचो कि है मिला क्या क्या
ये भी सोचो कि क्या लुटा बैठे
- डॉ. सुनील जोगी

जो छोटों को बढ़कर गले से लगाएं
बड़ों में भी अब वो बड़प्पन नहीं है
- डॉ. सुनील जोगी

उन्हें अंदाज ये आते बहुत हैं
वो मिलते कम हैं कतराते बहुत हैं
- डॉ. सुनील जोगी

नहीं दरख़्त तो थोड़ी सी घास रहने दो
ज़मीं के जिस्म पे कुछ तो लिबास रहने दो
- डॉ. सुनील जोगी

यार बिछड़े तो कभी खुद को तू ग़मगीन न कर।
इश्क़ करता है तो फिर इश्क़ की तौहीन न कर।।
- डॉ. सुनील जोगी

वक़्त का दरिया बहता जाये, तेज़ बहुत इसकी रफ़्तार
रात इकाई, नींद दहाई, ख्वाब सैंकडा, दर्द हजार ।
- डॉ. सुनील जोगी

मैं खुल के हंस तो रहा हूँ फ़क़ीर होते हुए
वो मुस्करा भी न पाया अमीर होते हुए
- डॉ. सुनील जोगी

मैं खुल के हंस तो रहा हूँ फ़क़ीर होते हुए
वो मुस्करा भी न पाया अमीर होते हुए
- डॉ. सुनील जोगी

खुशी का क्या है ये रुकती नहीं है आने पर।
बस एक ग़म है जो मुश्किल में साथ देता है।।
- डॉ. सुनील जोगी

हूँ पराया, तू मगर अपना बना ले मुझको।
मैं तो इक जश्न हूँ जो चाहे मना ले मुझको।।
- डॉ. सुनील जोगी

हाल ईमान का क्या बताएँ तुम्हें
ये वो सिक्का है जो अब चलन में नहीं
- डॉ. सुनील जोगी